Wednesday, 10 July 2013

इस बार चीन ने हिंदी में समझाया

नई दिल्ली। एक बार फिर चीनी सेना भारतीय सीमा घुस आई। लेह-लद्दाख के चुमुर इलाके में घुसकर चीनी सेना ने भारतीय सेना द्वारा लगाए गए सिक्यूरिटी कैमरों को भी तोड़ दिया। भारतीय सेना द्वारा बनाए गए कुछ अस्थाई ढांचों को भी गिरा दिया। साथ ही वहां मौजूद लोगों को चीनी सैनिकों ने हिंदी में इलाका खाली करने की धमकी दी।
गौरतलब है कि पिछले 3 महीने में दूसरी बार भारतीय सीमा में चीन ने घुसपैठ की है। इससे पहले अप्रैल-मई में भी चीनी सेना ने दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में घुसकर अपने अस्थाई कैंप स्थापित कर दिए थे। इतना ही नहीं उन्होंने वहां पर जो बोर्ड लगाया था, उस पर लिखा था कि वह यह चीन का इलाका है और आप चीन में हैं।
अंग्रेजी अखबार डीएनए में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ताजा घुसपैठ की घटना 17 जून की है। उस दिन चीनी सैनिकों ने घुसपैठ के बाद चुमुर में लगे कैमरों को तोड़ दिया। ये कैमरे हाई रेजॉलूशन के थे। भारतीय सेना ने अप्रैल में इन कैमरों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सैनिकों की निगरानी के लिए लगाया था। चीनी सैनिकों ने वहां के लोगों को हिंदी में वह जगह तुरंत खाली करने के लिए कहा।
अखबार की खबर के मुताबिक, भारतीय सीमा में घुसे चीनी सैनिक अच्छी तरह से हिंदी जानते थे। उन्होंने वहां रह रहे स्थानीय लोगों से कहा कि वे इस इलाके को तुरंत खाली कर दें, यह इलाका उनका है। इस घुसपैठ की सूचना खुफिया एजेंसियों ने सरकार को दी थी। इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस ने भी इसकी पुष्टि की है।
सरकार इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है। उत्तराखंड में आई आपदा के समय सरकार किसी अंतरराष्ट्रीय विवाद को जन्म नहीं देना चाहती थी। ताजा घटना के बाद 3 जुलाई को दोनों देशों की सेना के बीच हुई फ्लैग मीटिंग में भारतीय सेना के अधिकारियों द्वारा भी यह मुद्दा उठाया गया। सबूत के तौर पर टूटे हुए कैमरे भी दिखाए गए।
अप्रैल-मई में भी चीन की सेना ने दौलत बेग ओल्डी सेक्टर एलएसी का उल्लंघन किया था। इस घटना से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़Þ गया था, लेकिन भारतीय दबाव के बाद आखिरकार चीनी सैनिक वहां से हट गए थे। हालांकि, भारत को चीनी सरकार की यह बात जरूर माननी पड़ी थी कि इस इलाके में भारतीय सैनिकों की भी मौजूदगी नहीं होगी।
सबसे आश्यर्च की बात यह है कि यह घटना उस समय सामने आई जब रक्षा मंत्री एके एंटनी का चीन दौरे पर जाना तय हो गया था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन की ओर से निरंतर घुसपैठ की घटना चीन की पीएलए (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) और पीएलएएन (पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी) के बीच अंदरूनी लड़ाई का नतीजा है। चीनी नेतृत्व के अंदर अप्रत्यक्ष रूप से वर्चस्व की लड़ाई जारी है। यही कारण है कि साउथ चाइना समुद्र और लेह लद्दाख सेक्टर में चीन का रुख आक्रामक है।
for more news on political affairs visit http://campuscurrentaffairs.blogspot.in

राघव स्कैंडल के बाद मंत्रियों में हड़कम्प


  •  चर्चित चेहरों पर गड़ी मीडिया की निगाहें
  • हर किसी को सता रहा एमएमएस का भूत

भोपाल। अपने नौकर के साथ अप्राकृतिक सेक्स के मामले में फंसे भाजपा का धाकड़ मंत्री राघव के गिरफ्तार हो जाने के बाद यहां ऐसे मंत्रियों के हाथ पांव फूल गए हैं जिनपर कभी न कभी सेक्स स्कैंडल के आरोप लगते रहे हैं। फूलें भी क्यों न, चुनाव सामने हैं और लोग एक दूसरे को धूल चटाने किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं।
राघव की गिरफ्तारी के बाद यहां चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग ऐसे लोगों को याद करने की कोशिश कर रहे हैं जिनक नाम कभी न कभी सेक्स स्कैंडल से जुड़ा रहा है। मंत्रियों और विधायकों में बंगले से लेकर मंत्रालय तक और प्रवास के दौरान अय्याशी की शिकायतें समय समय पर सामने आती रही हैं पर मेन स्ट्रीम मीडिया अकसर ऐसी खबरों से परहेज करती आई है। पर अब मामलों के थाने से लेकर अदालतों तक पहुंचने के स्थान परिस्थितियां पलट गई हैं।
पिछले साल जनवरी में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री अजय विष्णोई का नाम उछला था। वक्फ बोर्ड के अधिकारी एसएमएच जैदी ने विष्णोई पर आरोप लगाया था कि वे उसकी पत्नी की डिमांड कर रहे थे। उन्होंने इंकार किया तो विष्णोई ने उसका तबादला नक्सल इलाके में करवा दिया। इस गैरकानूनी तबादले के खिलाफ वे कोर्ट में केस जीत गए पर उनका वेतन दो साल तक रोक दिया गया। मंत्री के एक कर्मचारी ने सुलह सफाई के लिए उन्हें अपनी पत्नी को साथ लेकर मंत्री से मिलने की सलाह दी। जब उन्होंने विष्णोई से इसकी शिकायत की तो उन्होंने बड़ी बेशर्मी के साथ कहा था, कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना ही पड़ता है। जैदी इस मामले को हाईकोर्ट ले गए जिसके बाद यह खबर बन गई।
पक्षपात के आरोप
जून में आदिवासी कल्याण मंत्री विजय शाह को बर्खास्त करने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर पक्षपात का भी आरोप लगा। पीसीसी अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने विष्णोई का मामला एक बार फिर उठाते हुए कहा कि गंभीर आरोपों के बावजूद विष्णोई अब तक मंत्री पद पर काबिज हैं जबकि शाह को केवल इसलिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया कि उसने सीएम की पत्नी को लेकर सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
इससे एक साल पूर्व फरवरी 2011 में भी भाजपा के एक जिलाध्यक्ष को सेक्स स्कैंडल के चलते अपना पद गंवाना पड़ा था। मंदसौर जिले के भारतीय जनता पार्टी जिलाध्यक्ष कारुलाल सोनी को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा ने निलंबित कर दिया था। विश्व हिंदू परिषद से लेकर भाजपा के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहने वाले सोनी की कथित सीडी भोपाल में मीडिया सहित अन्य लोगों तक पहुंच गई थी। इस सीडी में सोनी को एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था। सोनी ने कहा था कि कुछ लोगों ने  उनकी बढ़Þती लोकप्रियता से परेशान होकर यह साजिश रची है।
इससे पहले भाजपा के कद्दावर विधायक ध्रुव नारायण सिंह का नाम शेहला मसूद हत्याकांड के समय उभर कर आया था। ध्रुव नारायण सिंह की जाहिदा परवेज और शेहला मसूद, दोनों से करीबियां थीं। जाहिदा को उन्होंने पर्यटन मंडल के इंटीरियर डेकोरेटर्स पैनल में शामिल करवा दिया था। बाद में शेहला मसूद के साथ उनकी करीबियां बढ़ती गर्इं जिसकी वजह से शेहलू मसूद की हत्या कर दी गई। जाहिदा परवेज इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी थी।