Monday, 22 April 2013

हाल ए क्रिकेट : चंद्रकांत शुक्ला


मठाधीश के आते ही सत्संग में जुटे जोगी

क्या मुंबई के तीन दिग्गजों की रणनीति पर अकेले सर विवियन रिचर्ड्स का मोटिवेशन भारी पड़ गया! क्या मुंबई के दिग्गजों ने जय-वीरू की जोड़ी को बुझा हुआ तीर समझने की गलती कर दी! क्या एकाएक तीनों फ्रंटलाइन गेंदबाजों को रिप्लेस करने की रणनीति मुंबई के लिए भूल साबित हुई! दिल्ली डेयर डेविल्स की पहली जीत और मुंबई की तीन ओवर शेष रहते 9 विकेट से बड़ी पराजय के बाद ऐसे तमाम सवाल उठ रहे हैं।
 मुंबई इंडियंस के रणनीतिकारों में तीन प्रमुख नाम हैं अनिल कुंबले, सचिन तेंदुलकर और रिकी पोंटिंग जैसे दिग्गज क्रिकेटरों के, जबकि दिल्ली के लिए रणनीति बनाने वालों में दो दिन पहले तक प्रमुख खिलाड़ियों सहवाग और जयवर्धने के अलावा और कोई बड़ा नाम शामिल नहीं था। शायद इसी बात को महसूस करते हुए जीएमआर ने अपने समय में गेंदबाजों के लिए खौफ का दूसरा नाम रहे ‘सर’ विवियन रिचर्ड्स को शनिवार को ही टीम के साथ बतौर सलाहकार जोड़ा है। रविवार को अपने होम ग्राउंड कोटला में मुंबई जैसी मजबूत टीम के खिलाफ खेलने से पहले दिल्ली की टीम के खिलाड़ियों के चेहरे सर रिचर्ड्स का साथ पाकर जिस तरह चमक रहे थे, वह पूरी कहानी साफ कहने को पर्याप्त था। टीम में कहीं कोई कमी नहीं थी, खिलाड़ियों की प्रतिभा पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं था, बस जरूरत थी एक ऐसे व्यक्ति की जो उन्हें एकसूत्र में पिरो सके। इसे मैं आसान शब्दों में समझाने की कोशिश करूं तो छत्तीसगढ़ी में एक कहावत है-जादा जोगी मठ उजार, इसका अर्थ होता है कि अगर किसी मठ में ज्यादा जोगी हो जाते हैं और कोई मठाधीश न हो तो जोगी आपस में खींचातानी करने लगते हैं, ठीक कुछ इसी तरह की हालत दिल्ली की टीम में बनी रही होगी, ऐसा मुझे लगता है। अब रिचर्ड्स के आते ही सभी जोगी मठाधीश को शिरोधार्य मानकर उत्साह के साथ सत्संग में जुट गए। पहले क्षेत्ररक्षण करते हुए मुंबई जैसी मजबूत बल्लेबाजी वाली टीम को 162 रन पर रोककर गेंदबाजों ने अच्छा काम किया और उसके बाद जय और वीरू के नाम से मशहूर जयवर्धने और सहवाग की जोड़ी ने कमाल की बल्लेबाजी की। पहली बार दोनो अपनी क्षमता और प्रतिष्ठा के अनुरूप प्रदर्शन कर पाए। हालांकि दिल्ली की इस जीत में मैं मुंबई की रणनीतिक विफलता को भी बड़ा कारण मानता हूं।

No comments:

Post a Comment